अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘झुंड’ के रिलीज पर सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली हरी झंडी, 6 महीने में होगी जांच

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की फिल्म झुंड रिलीज होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। बता दे कि यह फिल्म एक एनजीओ के फाउंडर की कहानी पर आधारित है। लेकिन इस पर कॉपीराइट्स को लेकर आरोप लगाए गए हैं। उसके बाद  हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी थी।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिल्म के मेकर्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। अब फिल्म के रिलीज होने पर लगी रोक पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के रिलीज पर लगे बैन को हटाने से मना कर दिया है। मुख्य जज एस ए बोबडे की बेंच ने 19 अक्टूबर को टी सीरीज द्वारा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच को 6 महीनों में पूरा करने के बारे में आदेश देने की बात कही है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर होनी थी रिलीज

देश के मौजूदा हालातों को देखते हुए यह फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज की जानी थी। उसके पहले ही हैदराबाद के एक शॉर्ट फिल्म प्रोड्यूसर ने फिल्म के मेकर्स पर कॉपीराइट चुराने का आरोप लगा दिया। हालांकि प्रोड्यूसर्स का कहना है कि उनकी इस मामले में 1.3 करोड़ रुपए की डील हुई थी।

जो पैसा वह देने को तैयार हैं। लेकिन फिर इस मामले को सामने वाले पक्ष ने कोर्ट तक घसीट दिया। जिसके बाद 17 सितंबर को तेलंगना की एक निचली अदालत ने फिल्म के रिलीज पर इस विवाद के सुलझने तक बैन लगा दिया। हाई कोर्ट भी निचली अदालत के फैसले से सहमत रहा। वही अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले से सहमति जताई है।

6 महीने में होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि, इस फिल्म की रिलीज को लेकर जो भी विवाद है उसकी जांच छह महीने के अंदर पूरे होने के आदेश दिए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस बात पर असहमति जताते हुए प्रोड्यूसर्स के वकील का कहना है कि, इतने महीनों में तो यह फिल्म बेकार हो जाएगी।

अगर इस मामले में फिल्म के मेकर्स सामने वाले व्यक्ति को पैसे देने को तैयार हैं तो फिर इस पर लगा बैन जल्द से जल्द हटाया जाना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि, कोर्ट में इस मामले में कि जो भी शिकायत दर्ज हुई है उस पर 6 महीने के अंदर जांच पूरी कराए जाने का आदेश दिया जा सकता है।

फिल्म के मेकर्स को हो रहा है नुकसान

बता दें कि यह फिल्म एक एनजीओ स्लम सॉकर के संस्थापक विजय बर्से की लाइफ स्टोरी पर आधारित है। या फिल्म मई में रिलीज होने वाली थी। लेकिन लॉकडाउन के चलते की रिलीज रोक दी गई। जिसके बाद मौजूदा हालातों को देखते हुए फिल्म के मेकर्स ने इसे ओटीटी प्लेटफार्म अमेजॉन प्राइम पर रिलीज करने का फैसला लिया। लेकिन सितंबर में फिल्म कॉपीराइट से जुड़े विवादों में घिर गई। फिल्म के रिलीज पर लगे इस बैन की वजह से मेकर्स को बहुत नुकसान हो रहा है। मेकर्स ने ओटीटी प्लेटफार्म से फिल्म को रिलीज करने की भारी रकम ली है।

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