कॉमेडियन कुणाल कामरा ने अपनाया अड़ियल रास्ता, ट्वीट को हटाने की जगह जाएंगे जेल

मशहूर कॉमेडियन कुणाल कामरा इन दिनों गांधीवादी बन चुके हैं। कुणाल कामरा ने पूरे देश को अपने अनोखे अंदाज से बहुत हंसाया है। उन्होंने बहुत जरूरी बातें हंसते-हंसते लोगों को समझाई है। देश में हो रहे गंभीर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हास्य अंदाज में टिप्पणी करते हुए लोगों को जागरूक किया है। उनकी बातों पर ना तो कोई खुद को सोचने से रोक पाता है और ना ही हंसने से।

पिछले दिनों अर्णब गोस्वामी की जमानत के बाद से ही सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी करते हुए ट्वीट करने के बाद से वह सुर्खियों में बने हुए हैं। बता दे कि कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपने विवादित ट्वीट को हटाने या उसके लिए माफी मांगने से शुक्रवार को इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने जब अर्णब गोस्वामी को अंतरिम जमानत दी उसके बाद उन्होंने बहुत से ट्वीट किए जिसके लिए कामरा के खिलाफ गुरुवार को अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अवमानना कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी थी। वही कुणाल को मौका दिया गया कि वहां ट्वीट को हटाए या माफी मांग ले। लेकिन उन्होंने गांधी की राह पर चलते हुए पीछे हटने की जगह चुपचाप अपने सच के साथ रहने का फैसला किया है।

हो सकती है 6 महीनों की जेल

जनरल वेणुगोपाल ने अपने फैसले को सही बताते हुए बयान दिया है कि, लोगों को अब यह समझने की जरूरत है कि अगर वह सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं, तो उसके खिलाफ कोर्ट की अवमानना करने को लेकर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जिसके अंतर्गत दोषी को 6 महीनों तक की जेल हो सकती है।

लेकिन इसके बाद भी कुणाल कामरा ने अपना ट्वीट हटाने से इनकार कर दिया है। बल्कि उन्होंने तो सुप्रीम कोर्ट के जज और जनरल वेणुगोपाल के लिए एक ओपन लेटर लिखा है। उन्होंने अपने लेटर से खुद को गांधीवादी बताया है। कुणाल कामरा का मानना है कि सच की लड़ाई जारी रखने के लिए कई बार व्यक्ति कानून के खिलाफ चला जाता है। लेकिन फिर उसे उसकी सजा के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

माफी मांगने का कोई इरादा नहीं है

बता दें कि कामरा ने अपने ट्विटर पेज पर वेणुगोपाल और सभी सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए एक ओपन लेटर जारी किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि, हाल ही में उन्होंने जो ट्वीट किए उन्हें अदालत की अवमानना की तरह माना गया है। उन्होंने जो ट्वीट किए वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राइम टाइम के लाउडस्पीकर यानी कि अर्नब गोस्वामी की जमानत पर दिए गए अंतरिम फैसले के बारे में थे।

उन्होंने इसके आगे लिखा है कि, उनका दृष्टिकोण नहीं बदला है क्योंकि दूसरों की निजी स्वतंत्रता के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की खामोशी आलोचना के दायरे से बाहर नहीं रह सकती। सुप्रीम कोर्ट केवल कुछ लोगों के ही अधिकारों की रक्षा कर रहा है। जबकि ऐसे हजारों लोग हैं जो सुप्रीम कोर्ट से आस। लगाकर बैठे हुए हैं। कामरा ने लिखा कि, अपने ट्वीट को हटाने या उसके लिए माफी मांगने का उनका कोई इरादा नहीं है। उनका यही मानना है कि वे अपने लिए बोलते हैं। 

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