एक भाई ऐसा भी : नौकरी छोड़ कर बहन को कराने लगा UPSC की तैयारी, अब एक घर में दो IAS ऑफिसर

यूपीएससी परीक्षा वो खूबसूरत सपना है, जिसे एक साथ करोडों आंखें देखती हैं। मगर यह सपना पूरा महज़ मुट्ठी भर लोग ही कर पाते हैं। इस परीक्षा में सम्मिलित होने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने माथे पर संघर्षों का भारी भरकम बोरा उठा कर चलता है। इस रास्ते पर कई तरह के रौडे आते हैं, कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मगर जो सब कुछ सह कर जो बिना रुके बिना थके बस चलते ही जाते हैं, जो बस एक टक अपनी मंजिल को देखते हैं और उसे पाने के लिए कुछ भी कर जाने का जुनून रखते हैं वहीं लोग UPSC में सफलता हासिल करते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही सफल कैंडिडेट अर्तिका शुक्ला की कहानी सुनाने वाले हैं, जिन्होंने अपनी काबिलियत से एक स्वर्णिम वक्त रचा है। 

काशी के सेंट जॉन स्कूल से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई करने वाली अर्तिका शुक्ला कि शुरुआत से ही पढ़ाई में रुचि थी। इतना ही नहीं उनके होते हुए कोई भी क्लास में फर्स्ट नहीं आ सकता था। यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक उन्होंने स्कूक पास नहीं किया। स्कूल के बाद एमबीबीएस की डिग्री लेने के लिए अर्तिका मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में चली गयी। अर्तिका का पढ़ाई से दिल एमबीबीएस के बाद भी नहीं भरा उन्होंने इसके बाद पीजीआईएमईआर से एमडी भी किया है।

एक डॉक्टर पिता बजेश शुक्ला की बेटी होने के नाते अर्तिका भी एक डॉक्टर बनने का सपना ही देखा करती थी। उनकी होम मेकर माँ लीना शुक्ला अजर डॉक्टर पिता अर्तिका के सपने को साकार करने का हौंसला दे रहे थे। अर्तिका के दो भाई और हैं जिनका नाम गौरव और उत्कर्ष है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दोनों ही यूपीएससी की परीक्षा को सफल कर चुके हैं। उत्कर्ष जहां आईआरटीएस ऑफिसर हैं, तो वहीं गौरव आईपीएस ऑफिसर है। गौरव ही वो शख्स है जिसने अर्तिका को यूपीएसी परीक्षा के लिए तैयार किया था। 

अर्तिका का को गौरव का प्रस्ताव इतना पसंद आया कि उन्होंने एमडी की पढ़ाई को वहीं का वहीं छोड़ दिया, और अपने आपको पूरी तरह से यूपीएसी की परीक्षा में झोंक दिया। अर्तिका को खुद की काबिलियत पर इतना यकीन था कि उन्होंने पढ़ाई के लिए किसी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। हां लेकिन उनके इस सफर में उनके भाई गौरव ने उनका भरपूर साथ दिया और एक साये की तरह उन्हें सम्बल देता रहा। अर्तिका पर जिस तरह से सबका भरोसा था उन्होंने वैसा ही प्रदर्शन भी किया। और अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने इस परीक्षा को पार कर लिया। उन्होंने रैंक 04 के साथ एआईआर में प्रवेश कर लिया। 

अपने एक इंटरव्यू में अर्तिका ने कहा था कि अगर आप भी आईपीएस ऑफिसर बनना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे जरूरी है मेहनत और परिश्रम। 14 से 16 घंटे बिना ध्यान से पढ़ने की बजाय यदि 5 से 6 घंटा पूरी लगन से भी पढ़ा जाए तो परीक्षा को आसानी से निकाला जा सकता है। आपके अंदर इसके लिए देश सेवा का जुनून होना चाहिए। खुद को काबिल बनाने के बाद ही आप सफलता हासिल कर सकते हो।

लोकेन्द्र शर्मा प्राधान सम्पादक न्यूज मेनिया पिछले 10 सालों से वेब समाचार की दुनिया में कार्यरत हैं। आपने Wittyfeed, Laughing Colours, MP news, News Trend, Raj express, Ghamasan news जैसी संस्थाओं में अपनी सेवाएं दी हैं। तथा वर्तमान में आप हमारी संस्था के साथ जुड़ कर लोगों के इंटरटेनमेंट का ध्यान रख रहे हैं।

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