उत्तर प्रदेश में दाड़ी पर घमासान, दारोगा के निलंबन से भड़के मुस्लिम संगठन ने कर डाली यह मांग

उत्तरप्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों दाड़ी सुर्खियों में है। दरअसल उत्तरप्रदेश बागपत के एक मुस्लिम दरोगा ने बिना अनुमति के दाड़ी बढ़ा ली, चेतावनी देने के बाद भी जब दाड़ी नहीं कटाई तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। चूंकि मामले ने अब मजहबी रंग ले लिया है तो अब इस पर हंगामा तो होना ही था। अब पुरे मामले में देवबंद के उलेमा की भी एंट्री हो चुकी है, और उन्होंने कार्यवाही करने वाले पुलिस अधीक्षक को  ही सस्पेंड करने की मांग कर डाली है। 

गौरतलब है कि बागपत के रमाला थाने में पदस्थ दरोगा इसरार अली ने बिना किसी लिखिति आवेदन के अपनी दाड़ी को बढ़ाने के काम में लग गए। जब उनकी दादी मौलवी की तरह लंबी होने लगी तो उन्होंने उसे और सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए मेहंदी का लेप लगाना शुरू कर दिया अब दाड़ी चमकने लगी दूर से ही पता चल जाता की कोई मौलवी पुलिस की वर्दी पहन कर आ गया है। वहीं उन्होंने मौलाना का पूरा गेटअप लेने के लिए अपनी मूंछे भी साफ कर दी। 

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वहीं जब इस मामले में मीडिया पुलिस अधीक्षक के पास पहुंची तो उन्होंने जवाब दिया कि पुलिस विभाग में बस सिख ही बिना इजाजत दाढ़ी बढ़ा सकते हैं बाकी किसी भी धर्म के व्यक्ति के पास यह अधिकार नहीं है। किंतु यदि आपको फिर भी दाढ़ी बढ़ाना है तो आप लिखिति में आवेदन दीजिये बढ़े अधिकारियों को अगर उन्हें लगेगा कि आप सही कारण से दाढ़ी बढ़ा रहे है तो वो आपको अनुमति दे देंगे।  

मगर मौलाना इसरार अली मामले में या कहें कि दरोगा इसरार अली के मामले में उन्होंने ऐसी किसी भी अनुमति को लेने से साफ मना कर दिया और दाढ़ी को मेहंदी लगा कर चमकाने का काम जारी रखा। पुलिस अधीक्षक के अनुसार उन्हें 3 बार इस मामले में टोका भी गया मगर उनके कान में जूं तक भी नहीं रेंगी लिहाजा उसे सस्पेंड ही करना पड़ा।

वहीं मुस्लिम संगठनों की इस बर्खास्तगी से धार्मिक भावना आहत हो गयी है। इसलिए उस पुलिस अधीक्षक को बर्खास्त करने की मांग कर डाली जिसने दरोगा साहब को बर्खास्त किया था। इत्तेहाद उलमा ए हिंद के  राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी मुस्तफा देहलवी के अनुसार जब एक सिख दाढ़ी रख सकता है तो एक मुस्लिम क्यों नहीं? 

वहीं अगर संविधान की बात की जाए तो तो अनुच्छेद 25 के अनुसार हर नागरिक को अपनी धार्मिक आचरण और उसका प्रचार करने की पूर्ण छूट है। वहीं पुलिस ड्रेस कोड के अनुसार सिखों को छोड़कर कोई और समुदाय जैसे कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, जैन दाढ़ी नहीं बढ़ा सकते। इस नियम से नाराज मुस्लिम संगठन की मांग है कि कम से कम मुस्लिमों को तो छूट देनी चाहिए। 

लोकेन्द्र शर्मा प्राधान सम्पादक न्यूज मेनिया पिछले 10 सालों से वेब समाचार की दुनिया में कार्यरत हैं। आपने Wittyfeed, Laughing Colours, MP news, News Trend, Raj express, Ghamasan news जैसी संस्थाओं में अपनी सेवाएं दी हैं। तथा वर्तमान में आप हमारी संस्था के साथ जुड़ कर लोगों के इंटरटेनमेंट का ध्यान रख रहे हैं।

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