शर्मनाक : IPL में महेंद्र सिंह धोनी के फैल होने पर मिल रही है उनकी 5 साल की बेटी को रेप की धमकी

एक बेहद ही विचलित करने वाली घटना इन दिनों सोशल मीडिया के माध्यम से सामने अस रह है। जो हमारे सामाजिक ढांचे की बत्तियां उधेड़ने का काम कर रही है। यह घटना बता रही है कि मानवीय सभ्यता का पतन कैसे होता है, यह घटना बता रही है कि मानवीय आचरण जब क्षीण हो जाते हैं तो इंसान कितना नीचे गिर सकता है। यह घटना गवाह रहेगी हमारे दोगले पन की, कि किस तरह एक व्यक्ति के सफल होने और हम उसे ताज बना कर सिर पर बैठालेते हैं, मगर जब व्यक्ति विफल हो जाता है तो हम उसकी बेटी को रेप की धमकी देने से भी नहीं झिझकते। जी हां यह घटना सच-मुच हुई है, और भारत के अनमोल रत्न महेंद्र धोनी के साथ हुई है।

दरअसल मंगलवार के दिन जब चेन्नई सुपरकिंग्स और कोलकाता का मैच चल रहा था। चेन्नई को जीत के लिए 168 रनों की दरकार थी मगर टीम यह आंकड़ा पार नहीं कर पाई और 10 रनों से कोलकाता के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। धोनी भी इसमें अपना करिश्मा नहीं दिखा पाए जिसकी वजह से उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी। मगर कुछ सामाजिक कीड़ों ने सारी हदें पार कर दी, उन्होंने धोनी की पत्नी और 5 साल की छोटी सी प्यारी सी बच्ची जीवा की माँ को धमकी भरे मैसेज भेजते हुए कहा कि वो उनकी बेटी का बलात्कार कर देंगे। 

मामला सामने आते ही पूरे देश भर में इसके खिलाफ रोष और गुस्सा है। लोग इन धमकियों की आलोचना कर रहे हैं। इस क्रम में कई विशेष हस्तियों ने भी इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है।

 अभिनेता से नेता बनी नगमा ने ट्वीट किया, “हम एक राष्ट्र के रूप में कहां हैं? यह धोनी की 5-वर्षीय बेटी जीवा को सीएसके के आईपीएल मैच केकेआर से हारने के बाद बलात्कार की धमकी मिल रही है।” उन्होंने प्राधान मंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा “पीएम हमारे देश में यह क्या हो रहा है?” ? “

कर्नाटक के जयनगर से विधायक सौम्या रेड्डी ने अपनी टाइमलाइन पर लिखा, “यह सिर्फ बुरा है। हमारे देश में क्या हो रहा है? हम कहां जा रहे हैं?”

राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, “यह सबसे घृणित उदाहरण है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का दुरुपयोग कैसे किया जा रहा है।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी खिलाड़ियों के खराब प्रदर्शन पर लोगों का गुस्सा फूटा है। खुद धोनी ही कई बार इस तरह की अवहेलनाओं का शिकार हुए हैं। उनका घर तोड़ा गया है, उनके पोस्टर जलाए गए हैं। मगर इस बार जो हरकत की गई है वो किसी भी तरह से गुस्सा प्रकट नहीं करती, बल्की यह व्यक्ति की नीचता और बेहूदगी को प्रकट करता है। आलोचना करने का हक और अधिकार सिर्फ उन्हीं के पास है जिन्हें भाषाई मर्यादा पता है, और जिसे यह नहीं पता है उन्हें अपनी ज़बान बंद ही रखनी चाहिए। 

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