शायर मुन्नवर राणा ने उड़ाया अफगानिस्तान की स्थिति का मज़ाक, कहा भारत में भी तालिबान जैसा माहौल

एक शायर का काम होता है दुनिया को अदब की तालीम दे, दुनिया को वो नज़रिया दिखाए जिसे दुनिया देख नहीं पा रही हो। एक शायर का काम है नफरत के इस बाज़ार में मोहब्बत लुटाना। मगर लगता है देश के महानतम शायर मुन्नवर राणा नफरत में इतने डूब गए हैं कि वे अब मोहब्बत की बात करना ही भूल गए। अफगानिस्तान जैसे माहौल पर भी उन्होंने अपनी नफरत बरकरार रखी, और जिस वक्त पूरी दुनिया एक सोच पर चल रही है उस दौरान भी वे मज़हबी सोच में जकड़े दिखे। शायर का कहना है कि अफगानिस्तान के जो मौजूदा हालात है ऐसे हालात भारत में काफी पहले से हैं। भारत में पहले राम राज चलता था मगर अब कामराज चलता है। उन्होंने कहा कि अगर राम से काम है तो ठीक वरना कुछ भी नहीं। 

आज जहां पूरा विश्व तालिबान की आलोचना कर रहा है उस समय भी मुन्नवर राणा के यह शब्द भारत के गुलशन में कांटे बौते दिखाई दे रहे हैं, यही वजह है कि शायर के इस बयान का अब हर जगह विरोध हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दल उन्हें माफी मांगने के लिए कह रहे हैं। और शायर द्वारा दिये गए इस बयान को देश विरोधी भी बता रहे हैं। 

भारत में AC में बैठे शायर मुन्नवर राणा का यह बयान तमामा अफगानिस्तान के नागरिकों के मौजूदा संघर्ष पर एक व्यंग, एक मजाक है। शायर के शब्दों को समझे तो वो कहना चाहते हैं कि अफगानिस्तान के हालात सामान्य है, वहां के जो लोग चीख पुकार कर रहे हैं वो महज़ एक नाटक है। जो लोग अपना देश, अपना घर छोड़ कर जा रहे हैं वो बेवकूफ है। क्योंकि अफगानिस्तान में भी भारत जैसे ही हालत है, मगर इसके बाद भी यहां के लोग पलायन नहीं कर रहे तो फिर अफगानी लोग पलायन क्यों कर रहे हैं।

वहीं महिलाओं की आजादी के लिए सबसे बड़े अभिशाप तालिबान जो महिलाओं को इंसान ही नहीं समझता उसकी तुलना भारत से कर के क्या वे उन अफगानी महिलाओं का मज़ाक नहीं उड़ा रहे। जो तालिबान के डर से भारत में शरण चाहती हैं। ताकि वो आजादी के साथ अपना जीवन बिता सके। शायर मुन्नवर राणा क्यों नहीं उन हज़ारों अफगानी नागरिकों से यह बात कहते जो शरण के लिए भारत सरकार की और देख रहे हैं। अगर भारत में अफगानिस्तान जैसे हालात है तो कीजिये आप उन सभी अफगान नागरिकों से अपील की यहां ना आये वहीं रहें क्योंकि दोनों जगह बात तो एक ही है। 

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