रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि है कोलकाता का यह विश्व प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर, तांत्रिकों का हैं तीर्थ

भारत के कई प्राचीन मंदिर आज भी लोगों के लिए आस्था और पर्यटन का केंद्र हैं। इनकी बनावट, नक्काशी और इतिहास भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। इन्हीं मंदिरों में से एक है कोलकाता का दक्षिणेश्वर मंदिर। यह मंदिर केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में मशहूर है। देश विदेश से यहां भक्त देवी भवतारिणी के दर्शन करने आते हैं। देवी भावतारिणी काली माता का ही एक रूप है। काली माता का यह विश्व प्रसिद्ध मंदिर कोलकाता में हुगली नदी के किनारे बना हुआ है। शुक्रवार को गृह मंत्री अमित शाह मंदिर में माता काली के दर्शन करने पहुंचे थे। हम आपको इसी मंदिर से जुड़े कुछ तथ्य बताने जा रहे हैं। 

1855 में बना था मंदिर

यह मंदिर देश के प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर साल 1855 में बनाया गया था। बताया जाता है कि जान बाजार की रानी रासमणि काली मां के प्रति बहुत आस्था रखती थी और उन्होंने इस मंदिर को बनवाया था। इस मंदिर से विश्व विख्यात धर्मगुरु रामकृष्ण परमहंस का भी नाम जुड़ा हुआ है। यह मंदिर उनकी कर्मभूमि है। बता दे कि रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद के गुरु थे। उन्होंने धर्मगुरु और दार्शनिक होने के साथ रामकृष्ण मिशन स्थापना भी की। इसके अलावा रामकृष्ण परमहंस बंगाली और हिंदी नवजागरण के सूत्रधार भी रहे हैं। इस मंदिर को आज भी उनके नाम से जाना जाता है। मंदिर के प्रांगण में स्वामी जी का कक्ष आज भी मौजूद है। 

तांत्रिक गतिविधियों का है केंद्र

तांत्रिक गतिविधियों से जुड़े लोग बहुत मात्रा में साल भर इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। सभी तांत्रिक काली मां को बहुत मानते हैं। यही वजह है कि यह मंदिर तांत्रिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। देश भर से कई तांत्रिक यहां आकर काली मां को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ करते हैं। अन्य भक्तजन भी अपनी मुरादे लेकर साल भर यहां आते हैं।

कहां जाता है मां काली का दिव्य धाम

https://twitter.com/proudlymessedup/status/1322381760668356610?s=19

इस मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। यह मंदिर मां काली के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि, जब भगवान विष्णु ने देवी सती के शव के टुकड़े किए थे। तब इस मंदिर की जगह पर देवी सती के दाहिने पैर की 4 उंगलियां आकर गिरी थी। तब से ही इस जगह को बहुत पवित्र माना जाता। लोगों का मानना है कि यहां पर मां काली विराजती है। यही वजह है कि इस मंदिर को मां काली का दिव्य धाम भी कहा जाता है। 

नौ गुंबदों पर बना है दो मंजिला मंदिर

इस प्राचीन मंदिर की इमारत देखने लायक है। यह दो मंजिला मंदिर नौ गुंबदों पर बना हुआ है। इसका गर्भ ग्रह करीब 100 फीट ऊंचा है। गर्भ गृह में माता काली की मूर्ति रखी हुई हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि, यहां पर काली मां की मूर्ति लेटे हुए शंकर भगवान की छाती पर खड़ी हुई है। दक्षिणेश्वर काली मंदिर देशभर में काली मां के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। 

लोकेन्द्र शर्मा प्राधान सम्पादक न्यूज मेनिया पिछले 10 सालों से वेब समाचार की दुनिया में कार्यरत हैं। आपने Wittyfeed, Laughing Colours, MP news, News Trend, Raj express, Ghamasan news जैसी संस्थाओं में अपनी सेवाएं दी हैं। तथा वर्तमान में आप हमारी संस्था के साथ जुड़ कर लोगों के इंटरटेनमेंट का ध्यान रख रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.