अर्नब गोस्वामी के लिए बनाए गए थे अलग कानून, 41 दिनों से जेल में बंद मीडियाकर्मी के परिवार ने उठाए सवाल

पिछले दिनों रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। बता दें कि एक पुराने इंटीरियर डिजाइनर की आत्महत्या के केस मे गिरफ्तार हुए अर्णब गोस्वामी केवल 7 दिन के अंदर ही जेल से बाहर आ गए हैं। बाहर आने के बाद उन्होंने कहा है कि, सच और मीडिया में बहुत पॉवर होती है उसी पॉवर की वजह से आज वह बाहर आए हैं।

लेकिन दूसरी ओर एक और मीडियाकर्मी हैं जिसके लिए यह पॉवर काम नहीं आई है। बता दे कि मलयालम न्यूज वेबसाइट Azhimukham में कार्यरत जर्नलिस्ट सिद्दकी कप्पन पिछले 41 दिनों से यूपी के मथुरा जेल में बंद हैं। वह हाथरस केस को कवर करने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ हाथरस जा रहे थे। वहीं पर पुलिस ने उन पर राजद्रोह और लोगों के बीच धर्म को लेकर फूट डालने और दंगा करने की साजिश को लेकर गिरफ्तार कर लिया था। जिसके बाद से ही उनका पूरा परिवार उनकी जमानत का इंतजार कर रहा है। अर्णब गोस्वामी की जमानत के बाद उनकी पत्नी ने कई सवाल उठाएं है।

क्या देश के नागरिक नहीं है

बता दे कि कप्पन दिल्ली में रहकर काम करते थे वहीं उनका परिवार केरल के मल्लापुरम में रहता है। कप्पन की जमानत ना होने पर उनका परिवार बहुत निराश हैं। परिवार का कहना है कि, उनके लिए यह बहुत दर्दनाक और लंबा इंतजार है। अर्णब गोस्वामी के इस तरह 7 दिनों में ही जेल से बाहर आ जाने के बाद कप्पन की पत्नी रेहाना ने कई सवाल खड़े किए हैं। रेहाना का कहना है कि, जब उन्हें पता चला कि अर्णब गोस्वामी जेल से बाहर आ गए हैं।

तब उन्हें समझ आया कि उनके पति के साथ कितना गलत किया जा रहा है। क्या उनके पति देश के नागरिक नहीं हैं। क्या उनके कुछ निजी अधिकार नहीं है जिसकी रक्षा कोर्ट को करनी चाहिए। रेहाना ने आगे बताया कि, उनके पति की गिरफ्तारी के बाद उनके परिवार में से किसी को भी उनसे मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने हर स्तर पर कोर्ट से गुहार लगाई लेकिन किसी ने भी उनकी एक नहीं सुनी।

सबके लिए अलग-अलग है कानून 

रेहाना का कहना है कि, उन्हें अब भी अपने पति के लिए न्याय का इंतजार है। लेकिन अब उन्हें लगता है कि देश में सबके लिए अलग-अलग कानून है। अर्णब गोस्वामी के लिए देश के कानून में इतनी जल्दी फैसला ले लिया। लेकिन जब उन्होंने न्यायपालिका से गुहार लगाई तो उन्हें कोई मदद नहीं दी गई। इसीलिए उन्हें लगने लगा है कि यहां पर अब बराबरी से किसी को न्याय नहीं मिलता है। उन्होंने आगे अपने पति पर लगे सारे इल्जाम झूठे और आधारहीन बताएं। उनका कहना है कि उनके पति के पास तो हाथरस जाने की भी पैसे नहीं थे।

किसी तरह वह अपने दोस्तों के साथ न्यूज़ कवर करने के लिए हाथरस जा रहे थे। जहां पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। रेहाना ने आगे कहा कि, उन्होंने बहुत से राजनेताओं से भी मदद मांगी है लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की है। वह बहुत टूट चुकी है लेकिन अपने तीनों बच्चों के लिए वह यह जंग जारी रखेंगी। बता दें कि छह अक्टूबर को केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) की ओर से मामले में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई है।

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