सब्जी की खेती में ‘स्टेकिंग विधि’ है डबल मुनाफे की 100 % ग्यारंटी, अपनाना है बस यह आसान तरीका

यह युग नवीनता का युग है। और इस नए दौर में कदम से कदम मिलाकर चलना है तो उसके लिए नवीनता का दामन पकड़ना होगा। खेती के क्षेत्र में प्रतिदिन एक उन्नत तकनीक आ रही है जिसकी वजह से किसानों को ढेरों फायदा भी मिल रहा है। किसान भी अब इस नई तकनीक की और आकर्षित हो रहे हैं और इन्हें सिख कर नए तकनीक से खेती कर रहे हैं। नए जमाने की नई खेती कई बदलावों को ले कर आई है। यह ना सिर्फ नई शिक्षा का संचार कर रही है बल्कि किसानों को समृद्ध बनाने का काम भी कर रही है। लोग पहले कहते थे कि किसानी मुनाफे का धंधा नहीं हों मगर अब धीरे धीरे लोगों के दिमाग से यह भ्रांति भी खत्म हो रही है। आज हम आपके सामने एक ऐसी ही नई विधि लाएं हैं, जिसका नाम स्टेकिंग विधि है।  इस विधि का उपयोग करके आप अपना मुनाफा डबल कर सकते हैं। 

 सब्जियों की खेती वैसे तो भारत में हर जगह की जाती है मगर महोली ब्लॉक के दर्जनों ऐसे गाँव हैं जो सीतापुर ज़िला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एक क्षेत्र सब्जियों की खेती के लिए काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र के किसान इस नई तकनीक जिसका नाम स्टेकिंग विधि है उसकी सहायता से टमाटर की खेती करने का काम कर रहे हैं।  इस विधी में एक रस्सी के माध्यम से टमाटर के पौधों को बांधा गया है। अगर आप जा कर देखेंगे तो यह आसानी से आपको भी देखने को मिल जाएंगे। यहां के किसानों का कहना है कि इस विधि का उपयोग करके वे अधिक से अधिक मात्रा में मुनाफा कमा रहे हैं।

स्थानीय किसानों की माने तो इस क्षेत्र में भी सब्जी और फल की खेती उसी तरह होती थी जैसी बाकी जगह होती है। मगर जब से इस क्षेत्र में स्टेकिंग विधि आई है अधिकतर किसान इसी का उपयोग कर खेती कर रहे हैं। इसके पीछे की वजह बताते हुए स्थानीय किसान कहते हैं कि यह एक आसान विधि है जिसे हर कोई कर सकता है। साथ ही इसके लिए लागत भी कम ही लगती है, और कम समानों में भी इस विधि को उपयोग में लाया जा सकता है।

स्टेकिंग तकनीक को करने की विधि के बारे में बात करें तो इस तकनीक से टमाटर की खेती करने के लिए सबसे पहले बांस के डंडों की आवश्यकता होगी, इसके साथ ही इसके लिए लोहे के पतले तार और सुतली की भी आवश्यकता पड़ेगी। इस विधि में हमें सबसे पहले टमाटर के पौधों की नर्सरी तैयार करनी होती है। इस नर्सरी को तैयार होंने में लगभग तीन सप्ताह तक का समय लग जाता है और इन 3 सप्ताह में जब तक नर्सरी तैयार हो रही है तब तक खेत में चार से छह फीट की दूरी पर मेड़ को तैयार करने की तैयारी भी कर लेते है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्टेकिंग विधि में बांस के सहारे तार और रस्सी का जाल बनाया जाता है और उसके ऊपर ही पौधे की लताओं को फैलाया जाता है। और इस तरह एक ज़्यादा मुनाफे की खेती की।

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