सुशांत की आखरी फ़िल्म से किया डायरेक्टोरियल डेब्यू, ऐसा रहा ‘कास्टिंग छाबड़ा’ से डायरेक्टर बनने का सफर

कोई एक व्यक्ति अगर किसी मुकाम पर पहुंचता है तो उसकी पीठ पर कुछ लोगों के हाथों के निशान होते हैं, जो पीछे से उन्हें सहारा देने का काम करते हैं। सुशांत सिंह राजपूत के करियर में ऐसे लोगों में मुकेश छाबड़ा का भी नाम है। जिन्होंने एक्टर की काफी मदद की, मुकेश छाबड़ा इंडस्ट्री में डायरेक्टर, कास्ट‍िंग डायरेक्टर और एक्टिंग भी कर चुके हैं। सुशांत को उनका पहला ब्रेक काइ पौछे में देने वाले मुकेश छाबड़ा ही हैं। यह उस समय उस फ़िल्म के कास्टिंग डायरेक्टर थे। मुकेश छाबड़ा की वजह से ही उन्हें यह फ़िल्म मिली थी, वहीं अपने जीवन की आखरी फ़िल्म दिल बेचारा भी उन्होंने मुकेश छाबड़ा के साथ ही की। मुकेश छाबड़ा का 27 मई को जन्मदिन आता है तो आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें। 

 

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बता दें मुकेश छाबड़ा काफी सालों से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं, और वे फिल्मों में एक्टर्स की कास्ट‍िंग का काम कर रहे हैं। सन 1997 में अपनी आंखों में कई सपने ले कर मुंबई आए मुकेश छाबड़ा ने बतौर अस‍िस्टेंट कास्ट‍िंग डायरेक्टर अपने कर‍ियर की शुरुआत की। रॉकस्टार, चिल्लर पार्टी, गैंग्स ऑफ वासेपुर, शाह‍िद, काई पो चे, डी-डे, चेन्नई एक्सप्रेस, हैदर, तमाशा, दंगल, ट्यूबलाइट, संजू, भारत जैसी बड़ी फिल्मों में मुकेश की ही परखी आंखे कलाकारों को चुन कर लाई। बता दें मुकेश छाबड़ा ही वो शख्स हैं जिनकी वजह से राजकुमार राव को काई पो चे में पहली बार मौका मिला था, जो आगे चलकर बॉलीवुड के एक उम्दा अभिनेता बनकर सामने आए। 

 

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मुकेश ने के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने इंडस्ट्री में अपने पहले दिन से ही कास्ट‍िंग का ही जिम्मा अपने ऊपर लिया। जब उन्हें  सफलता मिली तो 2008 में उन्होंने अपनी खुद की कास्ट‍िंग कंपनी खोल ली जिसका नाम उन्होंने ‘मुकेश छाबड़ा कास्ट‍िंग कंपनी’ रखा। कंपनी और अपने काम की वजह से उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग नाम मिला और वे ‘कास्ट‍िंग छाबड़ा’ के नाम से फेमस हो गए। 

 

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हालांकि इस बात पर लोग कम ही ध्यान देते हैं कि कास्टिंग की दुनिया में सफलता हासिल करने वाले मुकेश छाबड़ा जब भी मौका मिलता है खुद भी कैमरे के सामने एक्टिंग करने से चूकते नहीं हैं। उन्होंने रंग दे बसंती, अमाल, कमीने, चिल्लर पार्टी, गैंग्स ऑफ वासेपुर-2, लव शव ते चिकन खुराना, रमन राघव 2.0, राजमा चावल जैसी फिल्मों में वे अपनी एक्टिंग के जलवे भी दिखाते दिखे। 

 

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मुकेश छाबड़ा और सुशांत की दोस्ती भी कमाल की थी, पिछले साल एक्टर की खबर सुन कर मुकेश छाबड़ा भी टूट गए थे। सुशांत के जीवन की आखरी फ़िल्म दिल बेचारा से मुकेश छाबड़ा ने डायरेक्टर के तौर लर पहली बार अपने हाथ आजमाए थे। इसके अलावा फ़िल्म राबता और केदारनाथ में भी मुकेश छाबड़ा ही कास्टिंग डायरेक्टर थे। दोनों एक दूसरे के साथ कमाल की बॉन्डिंग शेयर करते थे। सुशांत को मुकेश पर इतना यकीन था कि वे बिना स्क्रिप्ट पढ़े उन्हें हां कर देते थे।    

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