यह लड़ाई सुशांत और हाथरस की निर्भया के बीच नहीं है, बल्कि यह संघर्ष हर अन्याय के खिलाफ है

भारत एक गणतंत्र राज्य है, यहां हम सबको कई मौलिक अधिकार प्राप्त हुए हैं। जो हमें जीने, खाने, रहने से ले कर कई हक़ देते हैं। हम सुरक्षित रहे, हमे किसी बात की परेशानी ना हो इसके लिए एक पूरा सरकारी तंत्र हमारे लिए काम करता है। मगर इसके बावजूद भी क्या आप सुरक्षा महसूस करते हो ? क्या आपके अंदर इतना विश्वास है कि बिना भय के आप अपने बेटे को बड़े शहर ने छोड़ सकते हो? क्या बिना झिझक के आप अपनी बेटी को आधी रात को घर से बाहर भेज सकते हो ? अगर इन सब का उत्तर ना है तो फिर आपको आवाज उठाने की आवश्यकता है। अपने देश के लिए अपने परिवार के लिए आपको सड़को पर उतरने की जरूरत है।

आवाज उठाने वालों से सवाल क्यों ?

बहुत से लोग हैं जो आवाज उठाने की बाजाये, आवाज उठाने वालों से सवाल करते हैं। बहुत से लोग मुझे भी व्यक्तिगत रूप से मैसेज कर, फोन कर कहते हैं कि तुम्हारे लिए सिर्फ क्या सुशांत ही मुद्दा है? हाथरस की निर्भया के लिए कुछ नहीं लिखोगे। क्या उसके लिए तुम्हारे दिल में कोई हमदर्दी नहीं है? कई लोग गालियां भी देते हैं। मगर मैं उन सब से बस इतना ही कहता हूं कि मैं बस अन्याय के खिलाफ आवज उठा रहा हूँ, और अन्याय खिलाफ उठ रही एक आवाज में फिर वो सारी चीजें आ जाती है जो गलत हो रहीं हैं। फिर चाहे वो हाथरस की बच्ची के साथ दुर्व्यवहार हो, या सुशांत के साथ हुई नाइंसाफी।

दरअसल यह लड़ाई सुशान्त और हाथरस की बेटी के बीच नहीं है। बल्कि आप इस तरह की बातें कर इन दोनों के मुद्दे को फीका कर रहे हैं। अगर सही तरीके से देखा जाए तो यह दोनों ही पीड़ित है, इन दोनों के साथ ही अन्याय हुआ है। और यह दोनों ही अपने लिए इंसाफ चाहते हैं। फिर इनकी इंसाफ की लड़ाई में यह दरार पैदा करने वाले लोग कौन है? कौन चहता है कि इस देश की जनता हमेशा आपस में लड़ती रहे? कौन हमेशा मुद्दों को भटकाना चाहता है? इसका जवाब आप भी जानते हैं और मैं भी।

अपने हिस्से की रोशनी आप करें

इसके बाद भी अगर आपको लगता है कि मैं बस सुशांत के लिए इंसाफ की आवाज बुलंद कर रहा हूँ तो ठीक है अपने हिस्से की रोशनी मैं कर रहा हूँ, आपके हिस्से की रोशनी आप कर दीजिए। अपने हिस्से की आवज मैं उठा रहा हूँ, अपने हिस्से की आवज आप उठा दीजिये। चलिए मिलकर अन्याय के खिलाफ, साहस से, मिलकर आवाज उठाते हैं और हर पीड़ित को इंसाफ दिलाते हैं।

जाते-जाते एक बात याद रखियेगा अन्याय के खिलाफ जल रहे हर दीपक में तेल डालोगे तभी एक सुरक्षित राष्ट्र खुद को और अपने चाहने वालों को दे पाओगे, अगर किसी की अन्याय के खिलाफ उठ रही आवज को दबाने की या भटकाने की कोशिश आप आज तो कर लोगे। मगर भगवान ना करे कल को वो अन्याय भेष बदल कर आपकी दहलीज पर आ जाए और उस समय लोग आपके अन्याय को तुलनात्मक छोटा बता कर आपके दर्द को नाटक करार दें तब जो पीड़ा उत्पन्न होगी उसे महसूस कीजियेगा और फिर यह इंसाफ का दीपक बुझाने की चेष्टा कीजियेगा। ध्यान रहे अन्याय कभी छोटा बड़ा नहीं होता, अन्याय सिर्फ अन्याय होता है।

जय हिंद….

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