उद्धव सेना ने केबल ऑपरेटर्स को धमकाया, कहा – रिपब्लिक चैनल का प्रसारण रोको वर्ना..

महाराष्ट्र में शिव सेना इन दिनों पत्रकारों और मीडिया नेटवर्क को धमकाने, डराने का काम कर रही है। यह काम गुरुवार के दिन भी चालू रहा, शिव सेना ने सभी स्थानीय केबल ऑपरेटर को धमकी देते हुए ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ पर रोक लगाने को कहा है। बताया जा रहा है कि संजय राउत के नेतृत्व में बाकायदा केबल ऑपरेटर को धमकाया जा रहा है और ऐसा ना करने पर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहने को भी कहा है। 

गुरुवार को जारी एक पत्र के ज़रिए शिवसेना से जुड़े संस्था ‘शिव केबल सेना’ ने महाराष्ट्र में चल रहे केबल टीवी ऑपरेटरों से रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर तुरंत रोक लगा देने को कहा है। वहीं इस लेटर में साफ-साफ शब्दों में यह भी कहा गया है कि अगर शिव सेना की बात नहीं मानी और अर्नब गोस्वामी के चैनल को बंद नहीं किया गया तो इसका बुरा अंजाम भुगतने की धमकी भी दे डाली। 

बता दें कि शिवसेना द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ के खिलाफ यह कदम तब उठाया जा रहा है, जब मीडिया समुह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर अग्रेसिव रिपोर्टिंग कर रहा है, तथा महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की नाकामियां गिनवा रहा है। वहीं इसके साथ, हाल ही में BMC द्वारा अभिनेत्री कंगना रानौत के ऑफिस में बुलडोजर चला कर विवादस्पद तरीके से क्षति पहुंचाने के लिए भी शिवसेना और महाराष्ट्र सरकार की पूरे देश में आलोचना की जा रही है। रिपब्लिक चैनल ने इस खबर को प्रमुखता से जगह दी और कई कड़े सवाल महाराष्ट्र सरकार से किये। 

बता दें शिवसेना द्वारा जारी लेटर को प्रमुख टीवी केबल ऑपरेटर जैसे हैथवे, डेन, इन केबल, जीटीपीएल, सेवन स्टार, सिटी केबल्स को लिखा और उनसे कहा है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ ने सीएम उद्धव ठाकरे तथा गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का बार-बार इस्तेमाल कर पत्रकारिता की नैतिकता और दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है।  वहीं इस लेटर में यह भी लिखा गया है कि अर्नब ने अपने चैनल में एक अदालत बना रखी है। वहीं इस खत में कंगना को हरामखोर कहने वाले संजय राउत को अपना मार्गदर्शक बताया। 

 वहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर शिवसेना द्वारा कुटीर आघात करने के बाद रिपब्लिक चैनल ने अपना पक्ष रखते हुए बयान दिया कि “किसी समाचार चैनल को उसके दर्शकों तक पहुँचने से रोकने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी मशीनरी और डराने के तरीकों का उपयोग करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत उल्लंघन है। रिपब्लिक भारत को रोकने करने का यह प्रयास एक स्वतंत्र प्रेस पर हमला है और एक आपातकालीन मानसिकता को दर्शाता है जो हमारे समय में एक अराजकतावाद है और इस महान लोकतंत्र के लिए एक विडंबना है।”

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