उद्धव जी की शिवसेना ने यह साबित किया, सम्मान सिर्फ मुख्यमंत्री का करना चाहिए, महिला का नहीं

“शब्द अमृत भी है, शब्द जहरीले हैं विषधर से 

सोच समझ कर निकाल शब्द भाषा के तरकश से”

शब्द मानवीयता की निशानी माने जाते हैं, आप किसी से बात करते वक्त किस तरह के शब्दों का उपयोग करते हैं इससे आपके आचरण का अनुमान लगाया जाता है। मगर यही शब्द जब भाषायी मर्यादा लांघते हैं तो कानो को चुभने लगते हैं। और हाल ही में जिस तरह से शिवसेना और कंगना रनौत के बीच जुबानी जंग चल रही है यकीनन देश में बहुत से लोगों के कानों में दर्द अवश्य हुआ होगा। दोनों ही तरफ से भाषाई मर्यादा को लगभग ताक पर रख दिया था। कंगना ने जहां ‘तू’ शब्द का प्रयोग एक सूबे के माननीय मुख्यमंत्री के लिए किया तो वहीं मुख्यमंत्री जी के वफादार व्यक्ति संजय राउत ने कंगना को हरामखोर कह डाला। 

लिहाज़ा कंगना द्वारा माननीय मुख्यमंत्री को अपशब्द (तू) कहने पर उनके खिलाफ केस दर्ज कर दिया गया, मुमकिन है कि उन पर राजद्रोह का मुकदमा भी चलाया जाए। अब आप पूछेंगे संजय राउत ने भाषायी मर्यादा के उल्लंघन की सजा क्या पाई ? तो पहली बात आप यह सवाल भी तब पूछ पाएंगे जब आप महाराष्ट्र से ना हो, वरना महाराष्ट्र में रह कर सवाल करोगे तो घर पर बुलडोजर चलने की सभावाएँ हो सकती है। बहरहाल इसका अगर जवाब दूँ तो मैं कहूंगा संजय राउत को भाषाई मर्यादा हाशिये पर लाने के लिए बाकायदा शिवसेना ने सम्मानित किया है। जी हां उन्हें पार्टी का अब मुख्य प्रवक्ता बना दिया गया है। 

https://twitter.com/KanganaTeam/status/1303716356655734785?s=19

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या उद्धव जी की शिवसेना ने यह साबित कर दिया की सम्मान सिर्फ एक मुख्यमंत्री का होना चाहिए एक महिला का नहीं? मैं इसे उद्धव जी की शिवसेना इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैंने बालासाहेब के काल मे किसी शिवसैनिक को किसी महिला के लिए राष्ट्रीय मंच पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए नहीं देखा। नारी को दुर्गा का रूप बताने वाले बाला साहेब अगर आज होते तो शायद संजय जी इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं कर पाते।

महाराष्ट्र सरकार सुशांत सिंह केस में बुरी तरह से मुंह के बल गिरी है। अपनी इस हार को पचाने में नाकाम मुख्यमंत्री उद्धव जी और उनकी टीम के चेहरे पर एक बैचेनी एक खीझ अलग ही देखने को मिल रही है। फिर वो सुशांत केस में शुरुआत से ही मुखर रही कंगना के खिलाफ केस करने की बात हो या उनके दफ्तर पर बुलडोजर चलाने की बात हो उद्धव सरकार ने वो हर एक कार्य किया जो किसी भो सरकारी तंत्र को कभी भी शोभा नहीं दे सकता। 

हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने BMC की कार्यवाही से पल्ला झाड़ते हुए खुद को इस पूरे मामले से अलग कर लिया मगर संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में इस कार्यवाही को ‘उखाड़ दिया’ टाइटल दे कर उद्धव सरकार के दावे की खिल्ली उड़ा दी। बौखलाई शिव सेना देशव्यापी विरोध का सामना कर रही है मगर इसके बावजूद भी सत्ता के सुख में अभिमानित उद्धव सरकार टस से मस होने का नाम नहीं ले रही। लिहाजा एक महिला की अस्मिता, उसके सम्मान को तार-तार करने से भी टीम उद्धव बाज नहीं आ रही। मगर महाराष्ट्र सरकार को समझना चाहिए की अभिमान कभी भी किसी का नहीं टिकता। यह कुर्सी आचरण, विवेक, मर्यादा और नागरिक सम्मान जैसे पायों पर टिकी है। इसमें से एक भी पाया अगर गया तो आपकी यह कुर्सी डगमगा जाएगी। और सजंय जी आपको मरहूम शायर राहत साहब का यह शे’र सुनना भी चाहिए और इस पर अमल भी करना चाहिए। 

हाथों में खंजर ही नहीं, आंखों में पानी भी चाहिए।

ए-खुदा मुझे दुश्मन भी, खानदानी चाहिए।”

लोकेन्द्र शर्मा प्राधान सम्पादक न्यूज मेनिया पिछले 10 सालों से वेब समाचार की दुनिया में कार्यरत हैं। आपने Wittyfeed, Laughing Colours, MP news, News Trend, Raj express, Ghamasan news जैसी संस्थाओं में अपनी सेवाएं दी हैं। तथा वर्तमान में आप हमारी संस्था के साथ जुड़ कर लोगों के इंटरटेनमेंट का ध्यान रख रहे हैं।

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